Monday, 3 August 2015


एक अकेला इस शहर में #
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एक अकेला इस शहर में,
रात में और दोपहर में
आबोदाना ढूँढता है,
आशियाना ढूँढता है

एक अकेला इस शहर में,
रात में और दोपहर में
आबोदाना ढूँढता है,
आशियाना ढूँढता है
एक अकेला इस शहर में .        ...........


दिन खाली खाली बर्तन है
दिन खाली खाली बर्तन है,
और रात है जैसे अँधा कुँआ
इन सूनी अंधेरी आँखों में,
आँसू की जगह आता है धुँआ
जीने की वजह तो कोई नहीं,
मरने का बहाना ढूँढता है
ढूँढता है, ढूँढता है

एक अकेला इस शहर में,
रात में और दोपहर में
आबोदाना ढूँढता है,
आशियाना ढूँढता है
एक अकेला इस शहर में .         ..........


इन उमर से लंबी सडकों को
इन उमर से लंबी सडकों को,
मंजिल पे पहुँचते देखा नहीं
बस दौड़ती, फिरती रहती है,
हमने तो ठहेरते देखा नहीं

इस
 अजनबी से शहर में,
जाना पहचाना ढूँढता है
ढूँढता है, ढूँढता है

एक अकेला इस शहर में,
रात में और दोपहर में
आबोदाना ढूँढता है,
आशियाना ढूँढता है

एक
 अकेला इस शहर में .       ................     




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