Thursday, 30 July 2015

वो बुराई करें हम भलाई भरें , नहीं बदले की हो कामना !



मालिक तेरे बंदे हम
ऐसे हो हमारे करम

नेकी पर चले और बदी से टलें
ताकि हंसते हुये निकले दम

मालिक तेरे बंदे हम  ......

बड़ा कमज़ोर है आदमी
अभी लाखों हैं इसमें कमीं
पर तू जो खड़ा है दयालू बड़ा
तेरी कृपा से धरती थमी !

दिया तूने जो हमको जनम
तू ही झेलेगा हम सबके ग़म
नेकी पर चलें और बदी से टलें
ताकि हंसते हुये निकले दम |

मालिक तेरे बंदे हम .......

जब ज़ुल्मों का हो सामना
जब ज़ुल्मों का हो सामना
तब तू ही हमें थामना
वो बुराई करें हम भलाई भरें
नहीं बदले की हो कामना !

बढ़ उठे प्यार का हर कदम
और मिटते वैर का यह बरम !

नेकी पर चलें और बदी से टलें
ताकि हंसते हुये निकले दम |


    मालिक     तेरे     बंदे     हम          |                                  




 कतरा कतरा मिलती है
 कतरा कतरा जीने दो  , जिंदगी है, .................जिंदगी है बहने दो, बहने दो
 प्यासी हूँ मैं, प्यासी रहने दो
 रहने दो, ना .......................... २


 पहले तो कुछ ऐसा ही हुआ था , नींद में थी तुम ने जब छुआ था
 गिरते गिरते बाहों में बची मैं , हो सपने पे पाँव पड़ गया था
 सपनों में बहने दो ! , \
प्यासी हूँ मैं, प्यासी रहने दो रहने दो, ना ...............

 कतरा कतरा मिलती है , कतरा कतरा जीने दो जिंदगी है,
 जिंदगी है , बहने दो, बहने दो  प्यासी हूँ मैं,
 प्यासी रहने दो रहने दो ...................... !


 तुम ने तो आकाश बिछाया , मेरे नंगे पैरो में जमीं है
 कांटे भी तुम्हारी आरजू है , हो शायद ऐसी जिंदगी हसीं है
 आरजू में बहने दो ,
 प्यासी हूँ मैं ,प्यासी रहने दो रहने दो, ना ...........................

 कतरा कतरा मिलती है , कतरा कतरा जीने दो
 जिंदगी है, जिंदगी है , बहने दो, बहने दो
 प्यासी हूँ मैं , प्यासी रहने दो , रहने दो  |

 हलके हलके कोहरे के धुएँ में ,
 शायद आसमां तक आ गयी हूँ तेरी दो निगाहों के सहारे ,
 देखूँ तो कहा तक आ गयी हूँ कोहरे में बहने दो ,
 प्यासी हूँ मैं, प्यासी रहने दो रहने दो, ना .......... !

 कतरा कतरा मिलती है , कतरा कतरा जीने दो , जिंदगी है, जिंदगी है , बहने दो ,बहने दो ........ |


Monday, 27 July 2015

दिल तो बच्चा है जी


ऐसी  उलझी  नज़र  उनसे  हटती  नहीं
वल्ला  ये  धड़कन  बढ़ने  लगी  है ,     दांत  से  रेशमी  डोर  कटती  नहीं
उम्र  कब  की  बरस  के  सुफैद हो  गई  ,    कारी  बदरी  जवानी  की  छटती  नहीं
चेहरे  की  रंगत  उड़ने  लगी  है    , डर  लगता  है   तनहा  सोने  में  जी
दिल  तो  बच्चा  है  जी – २
थोडा  कच्चा  है  जी  , हाँ  दिल  तो  बच्चा  है  जी .................

ऐसी  उलझी  नज़र  उनसे  हटती  नहीं , दांत  से  रेशमी  डोर  कटती  नहीं
उम्र  कब  की  बरस  के  सुफैद  हो  गई , कारी  बदरी  जवानी  की   छटती  नहीं
रा  रा  रा ………................................

किस  को  पता  था  पहलू  में  रखा  , दिल  ऐसा  बाज़ी  भी  होगा
हम  तो  हमेशा  समझते  थे  कोई     , हम  जैसा  हाजी  ही  होगा
हाय  जोर  करें , कितना  शोर  करें  . बे  वजह  बातों पे  , हैं  वें  गौर  करें

दिल  सा  कोई  कमीना  नहीं

कोई  तो  रोके , कोई  तो  टोके , 
इस  उम्र   में  अब  खाओगे  धोके
डर  लगता  है  इश्क  करने में  जी
दिल  तो  बच्चा  है  जी – २  , थोडा  कच्चा  है  जीहाँ  दिल  तो  बच्चा   है  जी ...........

ऐसी  उदासी  बैठी है  दिल  पे  ,हंसने  से  घबरा  रहें  हैं
सारी  जवानी  कतरा  के  काटी  , पीरी  में  टकरा   गये  हैं
दिल  धड़कता  है  तो , ऐसे  लगता  है  वो , आ  रहा  है  यहीं , देखता  है नहीं  वो
प्रेम  की  मारे  कटार  रे

तौबा  ये  लम्हे  कटते  नहीं  क्यूँ  , आँखों  से  मेरी  हटते  नहीं  क्यूँ
डर  लगता  है  मुझसे  कहने  में  जी
दिल  तो  बच्चा  है  जी

दिल  तो  बच्चा   है  जी , थोडा  कच्चा  है  जी ,, हाँ  दिल  तो  बच्चा  है  जी
 रा  रा  रा ………................................

Thursday, 23 July 2015

तुम ही हमका हो संभाले , तुम ही हमरे रखवाले , तुम्हरे बिन हमरा कौनों नाहीं

 पालनहारे, निर्गुण और न्यारे ,  पालनहारे, निर्गुण और न्यारे
तुम्हरे बिन हमरा कौनों नाहीं  ,

हमरी उलझन सुलझाओ भगवन , तुम्हरे  बिन हमरा कौनों नाहीं

तुम  ही  हमका  हो  संभाले , तुम  ही  हमरे  रखवाले
तुम्हरे बिन हमरा कौनों नाहीं

तुम्हरे बिन हमरा कौनों नाहीं , तुम्हरे  बिन हमरा कौनों नाहीं


चंदा में  , तुम ही तो भरे हो चांदनी
सूरज में ,  उजाला तुम ही  से

यह गगन है मगन, तुम ही तो दिए हो इसे  तारे
भगवन, यह  जीवन  , तुम  ही   संवारोगे
तो क्या कोई  सँवारे

पालनहारे, निर्गुण और न्यारे
तुम्हरे बिन हमरा  कौनों नाहीं  –

जो सुनो तो कहे  प्रभुजी हमरी है  बिनती
दुखी जन को , धीरज दो
हारे नहीं वोह , कभी दुःख से
तुम निर्बल को ,  रक्षा दो

रह पाए निर्बल सुख से , भक्ति को शक्ति दो
भक्ति को शक्ति दो , जग के जो स्वामी  हो, इतनी तो अरज सुनो

है पथ में अंधियारे , दे दो वरदान में उजियारे

  पालनहारे, निर्गुण  और  न्यारे   ,,  तुम्हरे बिन हमरा कौनों नाहीं
हमरी उलझन सुलझाओ भगवन   ,,   तुम्हरे बिन हमरा कौनों नाहीं   .........  ३ )





Friday, 17 July 2015

भीष्मरूपी ! सुतसमरजयी ! जनती नहीं हो क्यूँ ?




                                         गंगा बहती हो क्यों   . … ?



                                                                                                             (  Bhupen  Hazarika )

Lyrics By:  नरेन्द्र शर्मा (हिन्दी)




Performed  By:-                                    भूपेन हज़ारिका ,      


कविता कृष्णमूर्ति ,      हरिहरन ,    शान


बिस्तिर्नो पारोरे        ,           ओशोखोंक्यो  जोनोरे
हाहाकार क्सुनिऊ     ,        निशोब्दे निरोबे
बुरहा लुइत तुमि,     ,           बुरहा लुइत , बुआ ,  कियो  !


विस्तार  है  अपार    ,      प्रजा  दोनों  पार
करे  हाहाकार      ,    निःशब्द  सदा   !
 गंगा  तुम   ,  .........................................   ओ  गंगा    बहती  हो  क्यूँ  ?

नैतिकता   नष्ट हुई      ,      मानवता भ्रष्ट हुई  !
निर्लज्ज  भाव से      ,   बहती हो क्यूँ ?
इतिहास  की  पुकार  ,      करे हुंकार !

गंगा की धार !
निर्बल जन को
सबल-संग्रामी  !     समग्रोगामी  !   बनाती नहीं हो क्यूँ   ?    

 विस्तार  है  अपार ……..! ..................

अनपढ़  जन   ,    अक्षरहिन  ,,  अनगीन जन  ,    खाद्यविहीन !
नेत्रविहीन !  देख !                   मौन हो ,  क्यूँ

इतिहास की पुकार  , करे हुंकार ,,        ओ गंगा की धार !
निर्बल जन ,  को सबल-संग्रामी  !     समग्रोगामी  !  


बनाती नहीं हो क्यूँ   ?   ................


व्यक्ति रहे -  व्यक्ति केंद्रत ! 
सकल समाज  -  व्यक्तित्व रहित !
निष्प्राण समाज  को छोड़ती ना क्यूँ ?

इतिहास की पुकार ………........… ( @ )

रुदस्विनी  ,  क्यूँ   रहीं   ?  
तुम   निश्चय  ,  चितन  नही !
प्राणों   में प्रेरणा ,     
देती  ना           क्यूँ  ?  ?????

उनमद अवमी     !     
कुरुक्षेत्रग्रमी ! 
 गंगे  जननी       !    नव भारत   में !    भीष्मरूपी    !   
सुतसमरजयी !
जनती नहीं हो.             क्यूँ


विस्तार है अपार |  

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 GLIMPSE OF CORRUPTION AND DEGRADATION OF MORAL VALUES IN THE
 PRESENT CIVILIZATION SEEMS TO BE AT THE LOWEST LEVELS.

THE PRESENT  STATE  OF  AFFAIRS   OF  A  HUMAN   MIND ,  IRRESPECTIVE
OF AGE   CASTE   AND   GENDER  

 EXPRESSES   THE   UTTER

DISILLUSIONMENT    OF   AN     ENTIRE GENERATION !
       
IT ALSO DEPICTS .................................

THE IMMEDIATE SENSE OF UGLINESS !
     
EMPTINESS ! AND AIMLESSNESS OF OUR YOUTH .