Thursday, 22 September 2016

ना तुम हमे जानो, ना हम तुम्हे जाने




ना तुम हमे जानो, ना हम तुम्हे जाने ………………………………


ना तुम हमें जानो, हम तुम्हें जानें

मगर लगता है कुछ ऐसा, मेरा हमदम , मिल गया !


ये मौसम ये रात ,चुप है, ये होंठों की बात, चुप है .

खामोशी सुनाने लगी है, दास्तां !

नज़र बन गई है, दिल की, ज़ुबां !

तुम हमें................


मुहब्बत के मोड़ पे हम, मिले सबको छोड़ के हम .

धड़कते दिलों का ले के , ये कारवां !

चले आज दोनों, जाने कहाँ ?


ना तुम हमें जानो, हम तुम्हें जानें !

मगर लगता है कुछ ऐसा, मेरा हमदम , मिल गया !