Saturday, 15 August 2015


अजीब   दास्ताँ  है  ये , कहाँ  शुरू  कहाँ खतम

ये  मंज़िलें  है  कौन सी , ना  वो  समझ  सके हम

अजीब  दास्ताँ  है  ये , कहाँ  शुरू  कहाँ  खतम

ये  मंज़िलें है कौन सी , ना वो समझ सके ना हम  !


ये  रोशनी  के साथ  क्यों , धुआँ  उठा  चिराग  उठे
ये  रोशनी  के साथ  क्यों , धुआँ   उठा  चिराग उठे

ये  ख़्वाब   देखती  हूँ मैं  , के जग  पड़ी  हूँ ख़्वाब से !


अजीब दास्ताँ है ये    , कहाँ शुरू कहाँ खतम , ये मंज़िलें है कौन सी  , ना वो समझ सके ना हम


मुबारकें  तुम्हें  के  तुम  , किसीके  नूर  हो  गए
मुबारकें  तुम्हें  के तुम  ,  किसीके   नूर हो  गए

किसीके इतने पास हो , के सबसे दूर हो गए !


अजीब दास्ताँ है ये   , कहाँ शुरू कहाँ खतम , ये मंज़िलें है कौन सी , ना वो समझ सके हम


किसीका  प्यार  लेके  तुम , नया  जहाँ  बसाओगे
किसीका  प्यार  लेके  तुम , नया  जहाँ  बसाओगे

ये शाम जब भी आएगी , तुम हमको याद आओगे  ...........


अजीब दास्तां है ये , कहाँ शुरू , कहाँ खतम , ये मंज़िलें है , कौन सी , ना वो समझ सके , हम  |



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