अजीब दास्ताँ है ये , कहाँ शुरू कहाँ खतम
ये मंज़िलें है कौन सी , ना वो समझ सके ना हम !
ये मंज़िलें है कौन सी , ना वो समझ सके ना हम !
ये रोशनी के साथ क्यों , धुआँ
उठा चिराग उठे
ये रोशनी के साथ क्यों , धुआँ उठा चिराग उठे
ये रोशनी के साथ क्यों , धुआँ उठा चिराग उठे
ये ख़्वाब देखती हूँ मैं , के जग पड़ी हूँ ख़्वाब से !
अजीब दास्ताँ है ये
, कहाँ शुरू कहाँ खतम , ये मंज़िलें है कौन सी , ना वो समझ सके ना हम
मुबारकें तुम्हें के तुम
, किसीके नूर हो गए
मुबारकें तुम्हें के तुम , किसीके नूर हो गए
मुबारकें तुम्हें के तुम , किसीके नूर हो गए
किसीके इतने पास हो , के सबसे दूर हो गए !
अजीब दास्ताँ है ये , कहाँ शुरू कहाँ खतम , ये मंज़िलें है कौन सी , ना
वो समझ सके न हम
किसीका प्यार लेके तुम , नया जहाँ बसाओगे
किसीका प्यार लेके तुम , नया जहाँ बसाओगे
किसीका प्यार लेके तुम , नया जहाँ बसाओगे
ये शाम जब भी आएगी , तुम
हमको याद आओगे ...........
अजीब दास्तां है ये , कहाँ शुरू , कहाँ खतम
, ये मंज़िलें है , कौन सी , ना वो समझ सके , न हम |

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