निर्बल से लड़ाई बलवान की -२ ,
यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की -२ ............
इक रात अंधियारी, थीं दिशाएं कारी -कारी , मंद-मंद पवन था चल रहा !
अंधियारे को मिटाने, जग में ज्योत जगाने , एक छोटा - सा दीया था , कहीं जल रहा !
अपनी धुन में मगन, उसके तन में अगन , उसकी लौ में लगन , भगवान की !
यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की ...........
कहीं दूर था तूफ़ान ................ !
कहीं दूर था तूफ़ान, दीये से था , बलवान , सारे जग को मसलने , मचल रहा
झाड़ हों या पहाड़, दे वो पल में उखाड़ , सोच-सोच के ज़मीं पे था , उछल रहा
एक नन्हा-सा दीया, उसने हमला किया -२ , अब देखो लीला विधि के विधान की !
यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की ..............
दुनिया ने साथ छोड़ा, ममता ने मुख मोड़ा , अब दीये पे , यह दुख ,पड़ने लगा -२
पर हिम्मत न हार, मन में मरना , विचार , अत्याचार की हवा से , लड़ने लगा
सर उठाना या झुकाना, या भलाई में मर जाना , घड़ी आई उसके भी , इम्तेहान की
यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की ................
फिर ऐसी घड़ी आई - २, घनघोर घटा छाई , अब दीये का भी दिल लगा , काँपने
बड़े ज़ोर से तूफ़ान, आया भरता उड़ान , उस छोटे से दीये का बल , मापने
तब दीया दुखियारा, वह बिचारा , बेसहारा
चला दाव पे लगाने, (बाज़ी प्राण की) - ४
चला दाव पे लगाने, बाज़ी प्राण की ,
यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की ............
यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की ............
लड़ते -लड़ते वो थका, फिर भी , बुझ न सका -२ , उसकी ज्योत में था , बल रे , सच्चाई का
चाहे था वो , कमज़ोर, पर टूटी नहीं , डोर , उसने , बीड़ा था उठाया रे , भलाई का
हुआ नहीं , वो निराश, चली जब तक , साँस , उसे आस थी , प्रभु के वरदान की
यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की............
सर पटक -पटक, पग झटक -झटक !
न हटा पाया दीये को , अपनी आन से !
बार -बार , वार कर, अंत में , हार कर !
तूफ़ान , भागा रे , मैदान से !
रही , अमर निशानी , बलिदान की ............
यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की ,, निर्बल से लड़ाई बलवान की
यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की ||

