Tuesday, 6 October 2015

निर्बल से लड़ाई बलवान की |











निर्बल से लड़ाई बलवान की - , 

यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की  - ............


इक रात अंधियारी, थीं दिशाएं कारी -कारी  ,   मंद-मंद पवन था चल रहा !
अंधियारे को मिटाने, जग में ज्योत जगाने  ,  एक छोटा - सा दीया था , कहीं जल रहा !

अपनी धुन में मगन, उसके तन में अगन    ,  उसकी लौ में लगन ,  भगवान की !

यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की ...........

कहीं दूर था तूफ़ान ................ !

कहीं दूर था तूफ़ान, दीये से था , बलवान        ,    सारे जग को मसलने , मचल रहा
झाड़ हों या पहाड़, दे वो पल में उखाड़           ,   सोच-सोच के ज़मीं पे था ,  उछल रहा
एक नन्हा-सा दीया, उसने हमला किया -२       ,  अब देखो लीला विधि के विधान की !

यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की ..............

दुनिया ने साथ छोड़ा, ममता ने मुख मोड़ा       ,   अब दीये पे , यह दुख ,पड़ने लगा -
पर हिम्मत  हार, मन में मरना , विचार      ,   अत्याचार की हवा से , लड़ने लगा
सर उठाना या झुकाना, या भलाई में मर जाना   ,   घड़ी आई उसके भी ,  इम्तेहान की

यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की ................

फिर ऐसी घड़ी आई  - , घनघोर घटा छाई     ,    अब दीये का भी दिल लगा , काँपने
बड़े ज़ोर से तूफ़ान, आया भरता उड़ान           ,      उस छोटे से दीये का बल , मापने

तब दीया दुखियारा, वह बिचारा , बेसहारा

चला दाव पे लगाने, (बाज़ी प्राण की) -

चला दाव पे लगाने, बाज़ी प्राण की              ,    

यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की ............



लड़ते -लड़ते वो थका, फिर भी  , बुझ सका  -२    ,    उसकी ज्योत में था ,  बल रे , सच्चाई का
चाहे था वो , कमज़ोर, पर टूटी नहीं , डोर             ,    उसने ,  बीड़ा  था  उठाया  रे ,  भलाई  का
हुआ नहीं , वो निराश, चली जब तक ,  साँस    ,  उसे  आस  थी ,  प्रभु  के   वरदान  की


यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की............


सर पटक -पटक, पग झटक -झटक !
हटा पाया दीये को , अपनी आन से !

बार -बार , वार कर, अंत में , हार कर !
तूफ़ान , भागा रे , मैदान से !

अत्याचार ,से उभर, जली ज्योत , अमर
रही , अमर निशानी , बलिदान की ............





यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की ,, निर्बल से लड़ाई बलवान की
यह कहानी है दीये की और तूफ़ान की  ||


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