ना तुम हमे जानो, ना हम तुम्हे जाने
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ना तुम हमें जानो, न हम तुम्हें जानें
मगर लगता है कुछ ऐसा, मेरा हमदम , मिल गया !
ये मौसम ये रात ,चुप है, ये होंठों की बात, चुप है .
खामोशी सुनाने लगी है, दास्तां
!
नज़र बन गई है, दिल की, ज़ुबां !
न तुम हमें................
मुहब्बत के मोड़ पे हम, मिले सबको छोड़ के हम .
धड़कते दिलों का ले के , ये कारवां !
चले आज दोनों, जाने कहाँ ?
ना तुम हमें जानो, न हम तुम्हें जानें !
मगर लगता है कुछ ऐसा, मेरा हमदम , मिल गया !

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